Saturday, 21 March 2015

तुम और मैं

समय और रंग

समय इंसान को बदल देता है

इंसान रंग बदल लेता है.

वक़्त और किस्मत



याद तुम्हारी हर वक़्त आती है,

किस्मत में तुम हो नहीं शायद.

ज़िनदगी और मौत

एक राह है, जो ख़त्म ही नहीं हो रही

दूसरी मंजिल है, जो कोसों दूर है.

इंसान और शैतान

एक खुद की बनायीं हुई मुसीबत है

दूजा मुसीबतों का ठंढा पड़ा बस्ता.

तुम और मैं

तुम दिल में बसी हो, शायद धड़कन में भी

और इक मैं ढूँढता हूँ, हर धड़कन में

तुमसा, तुम्हे, हमें, हमारा कोई

1 comment:

  1. This is a really touching poem, written full of love and desire. I hope the generation today appreciate this kind of gesture, just like how buy essays online for college here spend time in educating their students to become better individuals.

    ReplyDelete