Saturday, 21 March 2015

सब विद्रोही हैं

सब विद्रोही हैं यहाँ, इंकलाब पे उतर आये हैं

हर हाथ इक झंडा लिए,सब कुछ बदलने आये हैं

इस झुण्ड में एक टोली है,खादी का झोला है काँधे पे,कुरता


और ईक आधे शर्ट वाले भी,अरे रुको जीन्स है, कुछ टाई भी

हाँ, चस्मा है हर नाक पे, ताज जैसा.कलम की ताकत आजमा चाहती है

पत्रकार कहती है अपने आप को,सवाल करती है, जवाब मांगती है

न मिलने पर और सवाल है मन में,बचाये रखती है, फिर कभी सोच के

फिर आवाज़ आयी कहीं से,सब बीके हुए हैं, सब दलाल हैं

दूकान खोल के बैठे यह चोर हैं,यही समाज के ठेकेदार हैं

हाँ, दूकान से याद आया,आज सवेरे कहीं पढ़ा था

यहाँ फटे पुराने नोट बदले जाते हैं

जाने कौन कहता है फिर, सब बीके हुए हैं

सब तो विद्रोही हैं, अपनी ही कलम से.

2 comments:

  1. We are all a rebel in our own liking. A rebel heart that is willing to fight for our right and freedom. Unlike the rebels listed in Bid4Papers.com reviews who only knows black propaganda and war without a real purpose.

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